हमारे समाज में मां को एक देवी का दर्जा मिला हुआ है और इसी की बदौलत मातृत्व को संसार का सबसे बड़ा सुख माना जाता है। मगर दु:ख कि बात यह है कि हर मां इतनी खुशकिस्मत नहीं। इस दुनिया में कुछ मांएं ऐसी भी हैं जिन्हें न तो देवी माना जाता है और न ही उनका मातृत्व सुख का कारण है। जी हां, हम उन्हीं औरतों की बात कर रहे हैं जिन्हें ये समाज वेश्यायें, रंडी, तवायफ और न जाने किन-किन नामों से पकारता है, उनके मातृत्व को पाप और कलंक कहता है। ऐसी ही कुछ मांओं से कीजिये मुलाकात और जानिये उनके बच्चों और उनके सपनों को पॉडभारती के इस मदर्स डे विशेषांक में। कार्यक्रम की परिकल्पना व संचालन किया है शशि सिंह ने।
इस मार्मिक पॉडकास्ट को आप कभी भूल न पायेंगे, हमारा वादा है।
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15 Comments, Comment or Ping
समीर लाल
बहुत ही जबरदस्त और मार्मिक-एक चुनिंदा प्रोफेशनल पेशकश.
ग्रिजेश का गीत-
माई रे माई तोहर गुन गाई….
माई की ममता गवलो ना जाला,
जेहि दिन जहिये माई हिराई,
सब कुछ मिली जाहिये, मिलेहि न माई,
माई रे माई तोहर गुन गाई…….
इस गीत को सुनकर आँखें नम हो गई. सहज होने का प्रयास अब तक जारी है.
समाज के जिस तबके की बात आप लेकर आये हैं, आपका वादा बिल्कुल सच निकला- हम इस मार्मिक पॉडकास्ट को कभी भुल न पायेंगे.
बहुत बधाई. ऐसे ही अनेंकों अंकों का इन्तजार है. समस्त पॉडभारती टीम को नमन, साधुवाद और शुभकामनाऐं.
May 13th, 2007
Kakesh
अच्छी प्रस्तुति रही.
May 14th, 2007
पंकज बेंगानी
बहुत ही उम्दा. शानदार प्रस्तुतिकरण और शोध. शशिजी बहुत बधाई आपको.
May 14th, 2007
ajay brahmatmaj
takniki barikiyan kaam karte-karte aayengi.sundar pryas hai.ise kitabi aur hindi magzune ki style se door rakhen sound par jyada kaam karna hoga.
badhai.
May 14th, 2007
रचना
उम्दा प्रस्तुति!!! बच्चो को शुभकामनाएं..
May 14th, 2007
Chetna Sungh
Hi shashi Bhaiya , Matri divas per aapka yeh prastutitikaran ham logo ko bahut pasand aaya, visheshroop se esmein jo geet ka prayog kiya gaya hai, bahut hi achchha hai.
May 14th, 2007
Tarun
bahut sahi shashi, archie cards ki sanskriti se bahut juda.
May 15th, 2007
अनूप शुक्ल
सच में यह अविस्मरणीय है!
May 16th, 2007
Vijendra
Its to good, but I can’t hear it whole…
May 17th, 2007
नीरज दीवान
मातृदिवस पर समाज की तिरस्कृत मांओं को आपने याद किया. क्या इतना इंतज़ार करना होगा पॉडभारतीय के अंक का? अंतराल कम करें.
May 17th, 2007
Anurag Mishra
Why the comments are justified? Please left align them.
May 17th, 2007
ratna
बेहद मार्मिक, खूबसूरत और प्रशंसनीय प्रयास।
May 21st, 2007
sanjay patel
मेरी आंखों की कुछ बूंदें इस डिस्पेच पर …
May 22nd, 2007
sanjay patel
मेरी श्रीमती ये प्रतिक्रिया लिखते वक्त पास बैठी हैं…लिखवाती हैं…आज़ादी के इतने साल बाद भी यदि हम मां को इतना बेबस देख रहे हैं तो मातृ आराधना के सारे पर्व,पूजा,अनुष्ठान बेमानी हैं
May 22nd, 2007
debashish
अंक पसंद करने के लिये शुक्रिया और सुन्दर संयोजन के लिये शशि को बधाई!
May 23rd, 2007