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	<title>Comments on: अंक 6 : भारत, आलवेज़ टर्न्ड आन</title>
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	<description>Apni boli Apni baat</description>
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		<title>By: Shailendra Singh</title>
		<link>http://www.podbharti.com/episode6/#comment-469</link>
		<dc:creator>Shailendra Singh</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Sep 2007 10:05:40 +0000</pubDate>
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		<description>First of all congratulation for the concept.secondly how i can contribute to this medium. can i simply draft my work and paste it in the comments section or what? please guide me.

Shailendra.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>First of all congratulation for the concept.secondly how i can contribute to this medium. can i simply draft my work and paste it in the comments section or what? please guide me.</p>
<p>Shailendra.</p>
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		<title>By: प्रमेन्‍द्र</title>
		<link>http://www.podbharti.com/episode6/#comment-468</link>
		<dc:creator>प्रमेन्‍द्र</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Sep 2007 06:13:21 +0000</pubDate>
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		<description>अच्‍छा कार्यक्रम लगा, पिछले कुछ दिनों से स्‍पीकर और हेडफोन की अनुपलब्‍धता के कारण कार्यक्रम सुन नही पा रहा था। अगली कड़ी का इन्‍तजार रहेगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अच्‍छा कार्यक्रम लगा, पिछले कुछ दिनों से स्‍पीकर और हेडफोन की अनुपलब्‍धता के कारण कार्यक्रम सुन नही पा रहा था। अगली कड़ी का इन्‍तजार रहेगा।</p>
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		<title>By: Shyam Pandey</title>
		<link>http://www.podbharti.com/episode6/#comment-470</link>
		<dc:creator>Shyam Pandey</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Sep 2007 03:29:33 +0000</pubDate>
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		<description>देबाशीष को &lt;a href=&quot;http://www.bhashaindia.com/Patrons/SuccessStories/Debashish.aspx?lang=en&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;भाषा इंडिया के वेबसाइट पर&lt;/a&gt; देखकर मन प्रसन्न हो गया...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>देबाशीष को <a href="http://www.bhashaindia.com/Patrons/SuccessStories/Debashish.aspx?lang=en" rel="nofollow">भाषा इंडिया के वेबसाइट पर</a> देखकर मन प्रसन्न हो गया&#8230;</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: debashish</title>
		<link>http://www.podbharti.com/episode6/#comment-467</link>
		<dc:creator>debashish</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Aug 2007 20:27:14 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.podbharti.com/episode6/#comment-467</guid>
		<description>मित्रों, एपसोड सराहने के लिये और अपनी राय जताने के लिये शुक्रिया। विश्वनाथ जी, नीरज, श्याम ये सच है कि इस बार की रिकार्डिंग की गुणवत्ता खराब रही। आवाज़ की पिच का भी हम भविष्य में ख्याल रखेंगे। ये स्वीकार करने में हमें संकोच नहीं कि आडियो संबंधी तकनीकी समझ धीरे धीरे मैं और शशि ग्रहण कर रहे हैं, मुझे बताते हुये खुशी हो रही है कि हम अच्छी रिकार्डिंग के लिये निजी स्तर पर नये उपकरणों के लिये खासी रकम अपनी जेब से खर्च करने जा रहे हैं।

रही बात अमीन सायानी की नकल कि तो मैं तो रेडियो की खुराक पर ही बड़ा हुआ हूं, अमीन, मनोहर महाजन, हरीश भिमाणी जैसी आवाज़ों का मुरीद हूं, शायद अनजाने ही नकल हो जाती होगी, असलियत तो यही कि उनकी नकल कर पाने का भी माद्दा अपन में नहीं।

यकीन मानिये कि हम आवाज़ के लिये कोई विशिष्ट प्रयास नहीं कर रहे, हम वैसे ही बोल रहे हैं जैसा कि हमें लगा कि रेडियो पर बोलना चाहिये, हमारा सारा ध्यान सामग्री पर ही रहता है क्योंकि हमें विश्वास है कि आप जैसे श्रोता हमारी आवाज़ के दम पर नहीं कंटेंट के दम पर ही हमें दुबारा सुनने आयेंगे। भविष्य के लिये हमारी ढेरों योजनायें हैं, बस आपका साथ चाहिये, सिर्फ श्रोता के तोर पर नहीं, सहयोगी के रूप में भी।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मित्रों, एपसोड सराहने के लिये और अपनी राय जताने के लिये शुक्रिया। विश्वनाथ जी, नीरज, श्याम ये सच है कि इस बार की रिकार्डिंग की गुणवत्ता खराब रही। आवाज़ की पिच का भी हम भविष्य में ख्याल रखेंगे। ये स्वीकार करने में हमें संकोच नहीं कि आडियो संबंधी तकनीकी समझ धीरे धीरे मैं और शशि ग्रहण कर रहे हैं, मुझे बताते हुये खुशी हो रही है कि हम अच्छी रिकार्डिंग के लिये निजी स्तर पर नये उपकरणों के लिये खासी रकम अपनी जेब से खर्च करने जा रहे हैं।</p>
<p>रही बात अमीन सायानी की नकल कि तो मैं तो रेडियो की खुराक पर ही बड़ा हुआ हूं, अमीन, मनोहर महाजन, हरीश भिमाणी जैसी आवाज़ों का मुरीद हूं, शायद अनजाने ही नकल हो जाती होगी, असलियत तो यही कि उनकी नकल कर पाने का भी माद्दा अपन में नहीं।</p>
<p>यकीन मानिये कि हम आवाज़ के लिये कोई विशिष्ट प्रयास नहीं कर रहे, हम वैसे ही बोल रहे हैं जैसा कि हमें लगा कि रेडियो पर बोलना चाहिये, हमारा सारा ध्यान सामग्री पर ही रहता है क्योंकि हमें विश्वास है कि आप जैसे श्रोता हमारी आवाज़ के दम पर नहीं कंटेंट के दम पर ही हमें दुबारा सुनने आयेंगे। भविष्य के लिये हमारी ढेरों योजनायें हैं, बस आपका साथ चाहिये, सिर्फ श्रोता के तोर पर नहीं, सहयोगी के रूप में भी।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: नीरज दीवान</title>
		<link>http://www.podbharti.com/episode6/#comment-465</link>
		<dc:creator>नीरज दीवान</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Aug 2007 13:46:08 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.podbharti.com/episode6/#comment-465</guid>
		<description>अमीन सयानी की तरह तो क़तई न बोलें देबू दा.. बस ज़रा पिच हाई कर लें.. ज़रा-सी ताक़ी हम श्रोता सहजता से सुन सकें।
टेक गुरू हमेशा की तरह उम्दा हैं। जानकारी अच्छी होती है। किंतु एक बात खटक रही है। ब्लॉगजगत की खबरों या विमर्शों को शामिल करिए। या फिर नवागंतुक चिट्ठाकारों से परिचय कराएं। वरिष्ठजनों के इंटरव्यू तो बहोत हो चुके। नए लोगों को भी अपनापन दे सकें तो सार्थकता होगी।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अमीन सयानी की तरह तो क़तई न बोलें देबू दा.. बस ज़रा पिच हाई कर लें.. ज़रा-सी ताक़ी हम श्रोता सहजता से सुन सकें।<br />
टेक गुरू हमेशा की तरह उम्दा हैं। जानकारी अच्छी होती है। किंतु एक बात खटक रही है। ब्लॉगजगत की खबरों या विमर्शों को शामिल करिए। या फिर नवागंतुक चिट्ठाकारों से परिचय कराएं। वरिष्ठजनों के इंटरव्यू तो बहोत हो चुके। नए लोगों को भी अपनापन दे सकें तो सार्थकता होगी।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: श्याम पाण्डेय</title>
		<link>http://www.podbharti.com/episode6/#comment-466</link>
		<dc:creator>श्याम पाण्डेय</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Aug 2007 03:34:53 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.podbharti.com/episode6/#comment-466</guid>
		<description>पोड भारती के समुह को नमन &#124;
यह पोड कास्ट बहुत अच्छा था &#124; मुझे सुनने मे बहुत मजा आया &#124;

देबासीस की आवाज बहुत मधुर है पर थोड़ा सा धीमा बोलते है... मतलब बोलने का लय और ताल थोड़ा सा धीमा है पर और भी मधुर होगा जब &quot; अमीन सायानी जी &quot; की तरह थोड़ी सी गहराई लाने का प्रयत्न करें &#124;

नीलू कोठारी का report अच्छा था पर हमे भारत पर आधारीत report सुनना ज्यादा पसंद करेंगे &#124;

आपका,
श्याम पाण्डेय</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पोड भारती के समुह को नमन |<br />
यह पोड कास्ट बहुत अच्छा था | मुझे सुनने मे बहुत मजा आया |</p>
<p>देबासीस की आवाज बहुत मधुर है पर थोड़ा सा धीमा बोलते है&#8230; मतलब बोलने का लय और ताल थोड़ा सा धीमा है पर और भी मधुर होगा जब &#8221; अमीन सायानी जी &#8221; की तरह थोड़ी सी गहराई लाने का प्रयत्न करें |</p>
<p>नीलू कोठारी का report अच्छा था पर हमे भारत पर आधारीत report सुनना ज्यादा पसंद करेंगे |</p>
<p>आपका,<br />
श्याम पाण्डेय</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: G Vishwanath</title>
		<link>http://www.podbharti.com/episode6/#comment-462</link>
		<dc:creator>G Vishwanath</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Aug 2007 16:43:00 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.podbharti.com/episode6/#comment-462</guid>
		<description>Always turned on
===========

कुछ समय लगा हमारे लिये  web site  का सही नाम और  सही  spelling  पहचानने में ।
 हिन्दी में निवियो डॉट कॉम लिखने के बजाय
बहतर होता अगर आप नाम  nivio.com  लिखते । नहीं तो यह स्पष्ट नहीं होता कि  web site   क्या है ।

 nivio, niviyo, neeviyo  इत्यादि कुछ भी हो सकता है ।
रविशंकर जी की राय से मैं सहमत हूँ ।
जब कोई चीज़ हमारे पास पहले से ही हो तो बाहर दूर जाने की क्या आवशयकता है? आजकल 1Gb  से लेकर   8 GB capacity  तक के  pen drive  आसानी से उपलब्द हैँ और महँगे भी नहीं है. मैं तो  अपने  files  अपने पास रखना पसन्द करूँगा । क्यों किसी अनजान और गुमनाम  PC par पर रखें जहाँ  file  तक पहुँचने के लिये  internet  की ज़रूरत है । हाँ यह ठीक है कि हम दुनिया के किसी भी  PC  पर अपनी  files  तक पहुँच सकते हैँ ।लेकिन इसके लिये भरोसेमंद  internet connection   की ज़रूरत है । यह भी विचार करने वाली बात है कि हम आजकल  laptop  और  palm top computers  के युग में जी रहे हैँ ।  मुझे नहीं लगता कि यह योजना सफ़ल होगी । कुछ साल पहले  Net PC  की बात चल रही थी । क्या हुआ ? Net PC flop  हुआ । एक और बात मेरी समझ में नहीं आयी  ।  Invitation  के लिये पंजीकरण के बाद एक महीना क्यों? आजकल एक महिने में ज़माना बदल जाता है । किसके पास है इतना समय और धीरज ? एक महीने तक किसीकी रुचि टिकी रह  सकती है ? इसके अलावा, जैसे रविशंकर जी ने कहा, हिन्दी वालों के लिये कोई प्रस्ताव या आकर्षण प्रदान नहीं.

इस समय यह केवल एक रचनात्मक  प्रयोग है और इसके बारे में अब निर्णय लेना उचित नहीं होगा । आगे चलकर देखते हैँ इस प्रयोग का क्या नतीजा निकलता है ।

नीलू कोठारी का  report
==============
 recording quality   में कमी थी.
Eiffel tower  को देखने के लिये पचासी हज़ार भारतीय पर्यटक  Paris    पहुँचे? हाल ही में मैने अखबार में पढ़ा था कि विश्व के पर्यटकों को  Eifel Tower    ने ही सबसे ज्यादा हताश किया था ।

 London   में धूप ? मनोरंजक बात है ! इसे हम छापने लायक समाचार समझते हैं ! जब भारत में धूप निकल आता है कोई ध्यान ही नहीं देता !

picasso   के paintings   कि चोरी के बारे में मेरे मन में सवाल उठता है : चोर क्यों नहीं समझते कि इन चित्रों को बेचना कठिन होगा । खरीदने वाले इन चित्रों का कैसे प्रदर्शन करेंगे ? कब तक बंद कमरों के चार दीवारों के बीच इन चित्रों को अकेले में निहारते रहेंगे ? ऐसी चोरी और खरीदी से क्या फ़ायदा ?

देशभक्ति के गाने
===========

वन्दे मातरम की याद भी आई । ऐसे गाने आजकल सुनने को कहाँ मिलते हैं ?
रबीन्द्रनाथजी की अवाज़ सुनकर संतुष्ट हुआ. पहले कभी सुनने का मौका नहीं मिला था । क्या गाँधीजी, नेहरूजी, राजाजी, वल्लभभाई पटेलजी वगैरह महापुरुषों की आवाज़ भविष्य में सुनने को मिलेंगे?
podcast   सुनकर खुशी हुई.
अंक ७ की प्रतीक्षा में और शुभकामनओं के साथ,
 G  विश्वनाथ</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Always turned on<br />
===========</p>
<p>कुछ समय लगा हमारे लिये  web site  का सही नाम और  सही  spelling  पहचानने में ।<br />
 हिन्दी में निवियो डॉट कॉम लिखने के बजाय<br />
बहतर होता अगर आप नाम  nivio.com  लिखते । नहीं तो यह स्पष्ट नहीं होता कि  web site   क्या है ।</p>
<p> nivio, niviyo, neeviyo  इत्यादि कुछ भी हो सकता है ।<br />
रविशंकर जी की राय से मैं सहमत हूँ ।<br />
जब कोई चीज़ हमारे पास पहले से ही हो तो बाहर दूर जाने की क्या आवशयकता है? आजकल 1Gb  से लेकर   8 GB capacity  तक के  pen drive  आसानी से उपलब्द हैँ और महँगे भी नहीं है. मैं तो  अपने  files  अपने पास रखना पसन्द करूँगा । क्यों किसी अनजान और गुमनाम  PC par पर रखें जहाँ  file  तक पहुँचने के लिये  internet  की ज़रूरत है । हाँ यह ठीक है कि हम दुनिया के किसी भी  PC  पर अपनी  files  तक पहुँच सकते हैँ ।लेकिन इसके लिये भरोसेमंद  internet connection   की ज़रूरत है । यह भी विचार करने वाली बात है कि हम आजकल  laptop  और  palm top computers  के युग में जी रहे हैँ ।  मुझे नहीं लगता कि यह योजना सफ़ल होगी । कुछ साल पहले  Net PC  की बात चल रही थी । क्या हुआ ? Net PC flop  हुआ । एक और बात मेरी समझ में नहीं आयी  ।  Invitation  के लिये पंजीकरण के बाद एक महीना क्यों? आजकल एक महिने में ज़माना बदल जाता है । किसके पास है इतना समय और धीरज ? एक महीने तक किसीकी रुचि टिकी रह  सकती है ? इसके अलावा, जैसे रविशंकर जी ने कहा, हिन्दी वालों के लिये कोई प्रस्ताव या आकर्षण प्रदान नहीं.</p>
<p>इस समय यह केवल एक रचनात्मक  प्रयोग है और इसके बारे में अब निर्णय लेना उचित नहीं होगा । आगे चलकर देखते हैँ इस प्रयोग का क्या नतीजा निकलता है ।</p>
<p>नीलू कोठारी का  report<br />
==============<br />
 recording quality   में कमी थी.<br />
Eiffel tower  को देखने के लिये पचासी हज़ार भारतीय पर्यटक  Paris    पहुँचे? हाल ही में मैने अखबार में पढ़ा था कि विश्व के पर्यटकों को  Eifel Tower    ने ही सबसे ज्यादा हताश किया था ।</p>
<p> London   में धूप ? मनोरंजक बात है ! इसे हम छापने लायक समाचार समझते हैं ! जब भारत में धूप निकल आता है कोई ध्यान ही नहीं देता !</p>
<p>picasso   के paintings   कि चोरी के बारे में मेरे मन में सवाल उठता है : चोर क्यों नहीं समझते कि इन चित्रों को बेचना कठिन होगा । खरीदने वाले इन चित्रों का कैसे प्रदर्शन करेंगे ? कब तक बंद कमरों के चार दीवारों के बीच इन चित्रों को अकेले में निहारते रहेंगे ? ऐसी चोरी और खरीदी से क्या फ़ायदा ?</p>
<p>देशभक्ति के गाने<br />
===========</p>
<p>वन्दे मातरम की याद भी आई । ऐसे गाने आजकल सुनने को कहाँ मिलते हैं ?<br />
रबीन्द्रनाथजी की अवाज़ सुनकर संतुष्ट हुआ. पहले कभी सुनने का मौका नहीं मिला था । क्या गाँधीजी, नेहरूजी, राजाजी, वल्लभभाई पटेलजी वगैरह महापुरुषों की आवाज़ भविष्य में सुनने को मिलेंगे?<br />
podcast   सुनकर खुशी हुई.<br />
अंक ७ की प्रतीक्षा में और शुभकामनओं के साथ,<br />
 G  विश्वनाथ</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: रूपेश</title>
		<link>http://www.podbharti.com/episode6/#comment-464</link>
		<dc:creator>रूपेश</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Aug 2007 18:20:22 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.podbharti.com/episode6/#comment-464</guid>
		<description>अब &lt;a href=&quot;http://fundubytes.blogspot.com/2007/08/review-nivio-online-desktop.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;यह वीडियो&lt;/a&gt; भि देखें</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अब <a href="http://fundubytes.blogspot.com/2007/08/review-nivio-online-desktop.html" rel="nofollow">यह वीडियो</a> भि देखें</p>
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	<item>
		<title>By: G Vishwanath</title>
		<link>http://www.podbharti.com/episode6/#comment-463</link>
		<dc:creator>G Vishwanath</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Aug 2007 13:52:48 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.podbharti.com/episode6/#comment-463</guid>
		<description>बेसब्री से इन्तज़ार कर रहा था ।
सुनने के बाद टिप्पणी भेजूँगा ।
विश्वनाथ
जे पी नगर , बेंगळूरु</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बेसब्री से इन्तज़ार कर रहा था ।<br />
सुनने के बाद टिप्पणी भेजूँगा ।<br />
विश्वनाथ<br />
जे पी नगर , बेंगळूरु</p>
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